कोरोना से लड़ने के लिए सजग रहें
. आवाम ए अजीज हिंदी साप्ताहिक सागर सेंट्रल जेल में मास्कक बनाते कैदी
स्थानीय डिस्टलरी से बनाया गया सैनिटाइजर
स्व सहायता समूह में मास्क तैयार करती महिलाएं
कोरोना से बचने के लिए मास्क तैयार करने हेतु सागर सेंट्रल जेल में हतकरधों पर बन रहा कपड़ा
कोरोना युद्ध के लिए जिले को यूं तैयार रखें "
कोरोना जैसी चुनौती से लड़ने के लिए राजधानियों और महानगरों का मुंह देखने के बजाए स्थानीय संसाधनों से कैसी तैयारी की जा सकती है यह सागर जिले में देखा जा सकता है। एनजीओ मोड में काम करने के लिए चर्चित सागर कलेक्टर प्रीति मैथिल नायक ने जिला प्रशासन से लेकर महार रेजीमेंट के मुख्यालय तक को एकजुट करके आइसोलेशन वार्ड्स, सैनेटाइजर, मास्क जैसा हरेक इंतजाम चुस्त रखा है। इतना कि बड़े पैमाने पर भी महामारी फैल जाए तो पैनिक या अभावग्रस्त होने के बजाए लड़ाई लड़ी जा सकती है। जब सेनेटाइजर का अकाल हो गया है तब स्थानीय शराब फैक्ट्री को सेनेटाइजर बनाने के काम में लगा दिया गया।
सागर में नीतेन्द्र सिंह राठौर की डीसीआर डिस्टलरी से स्थानीय स्तर पर सेनेटाईजर तैयार करवाया जा रहा है। जिला आबकारी अधिकारी वंदना पाण्डे ने शुक्रवार को ही 250 लीटर सेनेटाईजर तैयार करा लिया है। इसे 5-5 लीटर की केन में रखा गया है। सीएमएचओ का कहना है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन के द्वारा सेनेटाईजर बनाने में निर्धारित की गई सामग्री जिसमें हाईड्रोजन परऑक्साईड, एल्कोहल, गिलिसरोल एवं डिस्टिल बॉटल के मिश्रण से तैयार कराया गया है।
बुंदेलखंड मेडिकल कालेज, जिला और तहसीलों के अस्पतालों के अलावा सेना के महार रेजीमेंट सेंटर में दो सौ बिस्तरों और ढाना आर्मी कैंप में सौ बिस्तरों के आइसोलेशन वार्ड का निर्माण हो चुका है। इनमें हर मेडीकल फेसीलिटी, संचार सुविधाओं सहित मौजूद है।
तैयार हो रहे हैं। केन्द्रीय जेल सागर के हथकरघा केन्द्र में कैदियों द्वारा वृहद पैमाने पर मास्क तैयार करने का कार्य शुरू हो चुका है। इस कार्य में 55 कैदियों को टास्क में शामिल किए गए है। जो प्रतिदिन 1000 मास्क तैयार कर रहे है। अभी तक 2500 मास्क तैयार किए जा चुके है। मास्क की गुणवत्ता निर्धारित मापदण्ड के अनुरूप है।इमास्क को बनाने में ताना 2/20एस एवं बाना 10 एस के धागे से लूम कपड़ा का उपयोग किया गया है। जो मास्क तैयार किए गए है उन मास्कों को भारतीय सेना, पीडब्ल्यूडी एवं अन्य सरकारी विभाग को 10 रूपये की कीमत पर दिया जा रहा है। केन्द्रीय जेल के हथकरघा केन्द्र में मांग के आधार मास्कों की पूर्ति करने की क्षमता है।
राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन देवरी में सिलाई केन्द्र की स्थापना कर लगभग 25 महिलाओं से मास्क बनवा रहा है। मास्क की कीमत 10 रूपये है। यहां 25 महिलाएं हर दिन 800 मास्क तैयार कर रही हैं। अभी तक 3300 मास्क बनाए जा चुके हैं। जिनमें से 2650 मास्क स्थानीय व सामाजिक संस्थाओं को बेचे भी जा चुके। 650 मास्क अभी स्टॉक में है। संध्या लोधी, सपना, कुसुम रैकवार, कौषल्या और उर्मिला इस काम का नेतृत्व कर रही हैं।
टिप्पणियाँ