लॉकडाउन का असर यमुना नदी की बदल गयी सूरत, दुर्लभ पक्षी भी आ रहे नजर


  • आवाम ए अजीज हिंदी साप्ताहिक 

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इटावा,25 अप्रैल। दुनिया भर में फैले लाइलाज कोरोना संक्रमण के कारण किये गए लॉकडाउन ने जहाँ आम जनजीवन को बुरी तरह से प्रभावित किया है वही नदियों की सूरत बदल दी है। बदली हुई सूरत वाली नदियों में यमुना नदी भी शामिल है।





उत्तर प्रदेश के इटावा जिले में प्रवाहित युमना नदी की स्थिति लॉक डाउन से पहले बहुत ही बुरी हुआ करती थी लेकिन आज नदी के पानी का ना केवल आचमन किया जा सकता है बल्कि उसको इंसानी सेवन लायक भी माना जा सकता है फिर भी इस बात का इंतज़ार बेहद जरूरी बन जाता है कि लॉक डाउन के बाद यमुना नदी के जल पर कोई शोध हो तो स्थिति बिल्कुल ही साफ हो । 

इटावा में युमना नदी के पुल के ठीक नीचे लॉक डाउन के दरम्यान जहाँ ब्लेक नेक्ड स्टार्क, वूली नेक्ड स्टार्क , पेंटिंड स्टार्क, स्कवेजर वल्चर, डॉरटर कॉरमोरेंट, लिटिल रिंग प्लोवर  आदि पक्षी आज दिख रहे है इससे पहले इनका यहाँ पर देखा जाना कतई संभव नही था।

सिर्फ इतना ही नही है कई जगह से इस बात की भी सूचनाएं है कि युमना नदी में मगरमच्छ, घड़ियाल ओर डॉल्फिनों को भी देखा जा रहा है लेकिन यह सँख्या उत्साहजनक नही है इसलिए इसका कोई भी बड़ा महत्व नही माना जा रहा है। 

नामचीन पर्यावरण विशेषज्ञ डॉ.राजीव चौहान का कहना है कि यमुना नदी दुनिया की प्रदूषित नदियों में से एक है । औद्योगिक कचरे के कारण यमुना नदी नहीं बल्कि नाले के रूप में दिखती है, जो विभिन्न प्रकार की बीमरियों का कारण भी बन रही है। यमुना एक्शन प्लान के नाम पर करोडों रुपया नदी को साफ करने के लिए खर्च भी किया जा चुका हैं, लेकिन इस बार लाॅकडाउन ने यमुना को साफ कर दिया। जिस पर किसी को हकीकत में यकीन नहीं हो रहा है।

लाॅकडाउन के चलते बन्द पडे कल कारखानों के चलते उससे निकलने वाला कचरा नदियों में नहीं जा रहा है लेकिन अब शहरो का ही केवल प्रयोग किये जाने वाला जल ही नदी मे डाला जा रहा है। वैसे दिल्ली से आगरा तक यमुना नदी की बदहाली किसी से छुपी नही थी लेकिन अब इसकी सूरत बदल रही है। लेकिन इसको फिर भी असल पता तभी लगेगा जब लाॅक डाउन के बाद इस पर शोध किया जायेगा।

 

जैसी आज यमुना नदी की सूरत दिखाई दे रही है ऐसी 1990 से पहले ही दिखाई दिया करती थी ।

करीब एक साल पहले आये अध्ययन में कहा गया कि यमुना नदी का सबसे प्रदूषित हिस्सा दिल्ली से उत्तर-प्रदेश के इटावा तक है । इसी रिपोर्ट के आधार पर यह दावा किया गया था कि दिल्ली से इटावा के बीच यमुना सबसे अधिक प्रदूषित है । इन सैंपलों को कई मापदंडों पर परखा गया। जिसमें तापमान, पीएच, डिजाल्वड आक्सीजन, बायोलाजिकल आक्सीजन डिमांड, टोटल डिजाल्वड सालिड आदि शामिल हैं । इस जांच के रिजल्ट के बाद इन बिंदुओं पर पानी को इंडियन वाटर क्वालिटी स्टैंटर्ड पर रखा गया।

इस हिस्से में नदी अपने सबसे अच्छे रूप में है। यहां नदी के पानी को विभिन्न कामों के लिए प्रयोग किया जा सकता है।

यमुनोत्री ग्लेशियर से निकलने वाली यमुना देश के सात हिस्सों से गुजरती हुई  इलाहाबाद में गंगा के साथ मिलकर  संगम पर समाप्त हो जाती है  इस दौरान  लगभग 1400 किलोमीटर की यात्रा करती है ।  अपनी इस यात्रा में लाखों लोगों को उनकी जरूरत के लिए पानी देती है।  देश की राजधानी दिल्ली के अतिरिक्त कई बड़े शहरों का  अपशिष्ट, औद्योगिक प्रतिष्ठानों  तथा खेती से निकलने वाले  प्रदूषक इस नदी में डाले जा रहे हैं। जिस पर नदी में प्रदूषण की मात्रा काफी बढ़ गई है तथा यमुना नदी का पूरा इकोसिस्टम बदल रहा है।

पर्यावरण संस्था सोसायटी फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर के सचिव संजीव चौहान का कहना है कि उनकी संस्था यमुना एक्शन प्लान से साल 2006 से जुड़ कर लोगो को जागरूक करने में लगी हुई है लेकिन जितनी युमना नदी आज साफ नज़र आ रही है इससे पहले कभी भी नही देखी गयी है।

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