मिर्ज़ापुर में मिले फर्जी नियुक्ति वाले 64 सरकारी कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त

आवाम ए अजीज हिन्दी साप्ताहिक 



उत्तर प्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ चलाई जा रही मुहिम के तहत योगी सरकार ने मिर्ज़ापुर स्वास्थ्य विभाग में ये बड़ी कार्रवाई की है शासन के निर्देश पर जनपद के स्वास्थ्य विभाग में चतुर्थ कर्मचारी के पद पर तैनात 64 फर्जी नियुक्ति वाले कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त कर दी गई हैं। लखनऊ से निर्देश पर जिले में हुई कार्रवाई के बाद कर्मचारियों में भयंकर हड़कंप मचा हुआ है।



उत्तर प्रदेश सरकार यानी योगी सरकार ने मिर्जापुर स्वास्थ्य विभाग में बड़ी कार्रवाई की है। शासन के निर्देश पर मिर्ज़ापुर स्वास्थ्य विभाग में चतुर्थ कर्मचारी के पद पर तैनात 64 कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त कर दी गई हैं।


मिर्ज़ापुर जनपद में स्वास्थ्य विभाग में फर्जी नियुक्ति के आधार पर नौकरी कर रहे 64 कर्मचारियों की सेवा शासन के निर्देश के बाद समाप्त कर दी गई हैं। इन भर्तियों को लेकर काफी समय से सीबीसीआईडी ( CBCID ) की जांच चल रही थी, जिसमें पूरी तरह से फर्जी पाया गया।


साथ ही साथ ये भी बताया जा रहा है कि स्वास्थ्य विभाग में यह फर्जी नियुक्ति वर्ष 1996 से 1998 के बीच हुई थी,फर्जी आधार पर नौकरी कर रहे इन कर्मचारियों के खिलाफ जांच पिछले 18 वर्षों से चल रही थी और 10 जून 2020 को आर्थिक अपराध शाखा, वाराणसी ने जब अपनी जांच रिपोर्ट शासन को सौंपी तो शासन ने तत्काल सभी को बर्खास्त करने का आदेश दिया।


मिर्ज़ापुर के मुख्य स्वास्थ्य अधिकारी ओपी तिवारी ने बताया, 64 लोगों की नियुक्तियां शासन के निर्देश पर समाप्त कर दी गई हैं। दरसअल ये नियुक्तियां साल 1996 से 1998 के बीच हुई थीं और इसकी सीबीसीआईडी जांच भी चल रही थी, जिसमें पाया गया कि ये नियुक्तियां फर्जी हैं।इस बात का खुलासा 2002 में उस वक्त हुआ, जब शासन से ऑडिट करने आई टीम ने उनकी सर्विस बुक मांगी। ऑडिट के दौरान टीम को 72 लोगों की सर्विस बुक नहीं दी गई और सर्विस बुक बाद में उपलब्ध कराने के लिए कहा गया . संदेह के आधार पर टीम ने शासन को जांच की सिफारिश कर दी। इसमें निर्धारित नियमों का पालन नहीं किया गया था।


जिसकी सीबीसीआईडी जांच भी चल रही थी। जांच के बाद पाया गया कि इन नियुक्तियों में नियमों का पालन नहीं किया गया था, इसलिए यह फर्जी नियुक्ति है। सभी को लगातार वेतन भी दिया जा रहा था, इनमें से कई का प्रमोशन भी हो गया था और वे लिपिक बन गए थे। इस घटना पर सीएमओ का कहना है कि आदेश के बाद सभी की सेवाएं समाप्त कर दी गई


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