सैफई विश्वविद्यालय में सफाई कर्मचारियों की हड़ताल, पर्दे के पीछे कौन है किरदार!!!

सहयोगी आवाम-ए-अजीज हिन्दी साप्ताहिक 


इटावा सैफई सैफई विश्वविद्यालय में सफाई कर्मचारी आज सुबह से अपने वेतन की माँग को लेकर सुबह से काम ठप्प कर हड़ताल पर बैठे है और अपनी 5 माह से लटके वेतन की माँग कर रहे है,मेरे द्वारा 5 जून को लिखे शीर्षक"सैफई विश्वविद्यालय में सफाई कर्मचारियों की बदहाली के बहते आँसू" के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने अगले ही दिन सफाई ठेके की नई फर्म शार्प ग्लोबल के दो महीने से लटके भुगतान में से एक महीने का भुगतान 36 लाख रुपया जारी कर कर्मचारियों के आँसू पोंछने का इंतजाम तो कर दिया लेकिन यह इंतजाम कर्मचारियों का अधूरा रह गया,293 कर्मचारियों और 11 सुपरवाइजर में से केवल 100 से 125 कर्मचारियों को ही शार्प ग्लोबल फर्म की तरफ से खातो में पैसे भेजे गये,जिन कर्मचारियों के खाते नही खुले है उनको अभी पैसा नही दिया गया है।।



सुबह से विश्वविद्यालय में सफाई कर्मचारी बैठे है धरने पर



सफाई कर्मचारियों का आरोप है कि विश्वविद्यालय से एफआईआर दर्ज कर ब्लैक लिस्टिड की गई साबरीन फर्म कर्मचारियों का तीन माह का वेतन नही दे रही है और नई फर्म शार्प ग्लोबल भी दो माह से वेतन नही दे रही है अब कर्मचारी जाये तो जाये कहाँ,पिछले 5 माह से अपनी बदहाली के आँसू बहाते आ रहे सफाई कर्मचारियों के सामने परिवार का पेट भरने की चुनौती है।लेकिन यह चुनौती अब बहते आँसू की जगह विश्वविद्यालय प्रशासन को आज रुआँसु करने पर उतर आया 



हड़ताल के पीछे जयशंकर और साबरीन फर्म का साथ तो नही!!!


 


पिछले आर्टिकल में ओएसडी जयशंकर प्रसाद और साबरीन फर्म के मालिक सिराज चौधरी के बीच लगातार हो रही वार्ताएं 1 अप्रैल,2 अप्रैल,11 और 15 अप्रैल की आवास पर हुई मुलाकाते इस बात का साफ इशारा करती नजर आ रही है कि सफाई कर्मचारियों के आज के इस आंदोलन के पीछे कही जयशंकर प्रसाद और साबरीन फर्म की दोस्ती के दिमाग की उपज तो नही!!आज शाम को जिस तरह सफाई कर्मचारियों की हड़ताल उग्र हुई उसके पीछे मास्टरमाइंड का खेल जरूर नजर आया।सुबह से चल रही हड़ताल शाम तक चिकित्सा अधीक्षक कार्यालय में धक्का मुक्की तक पहुँच गयी,पूनम नाम की महिला सफाई कर्मी ने विश्वविद्यालय के एमएस डॉक्टर आदेश कुमार पर डंडे से मारने का आरोप लगाया जिस वजह से सफाई कर्मियों ने एमएस कार्यालय में घुसकर हॉट टॉक तक नोबत आ गई, एसडीएम सैफई, एसओ और विश्वविद्यालय प्रशासन को बचाव करना पड़ा, भारी पुलिस फोर्स के बीच लोगो को जाकर समझाने का प्रयास किया जा रहा है।।


सफाई कर्मचारियों केआज दिखे पल पल बदलते तेवर 


आजतक कभी विश्वविद्यालय में सफाई कर्मचारियों का आज जैसा उग्र रूप कभी देखने को नही मिला,सफाई कर्मी महिलाएं आगे रहकर वीरांगना लक्ष्मीबाई की तरह दहाड़ती नजर आयी लेकिन उनका नेतृत्व करने वाला आज की कहानी का किरदार पर्दे के पीछे रहा, सफाई कर्मचारियों को तीन दिन पहले नई फर्म शार्प ग्लोबल द्वारा 1 माह का वेतन दिया गया,उसके बाद भी आज सफाई कर्मचारियों ने अपने आप को विश्वविद्यालय में परमानेंट करने का मुद्दा उठाकर यह जरूर साबित कर दिया कि इस पूरे आंदोलन के पीछे पर्दे का किरदार कोई और है,कही ना कही आज सोची समझी रणनीति का टी ट्वेन्टी ट्वेन्टी का खेल खिलता नजर आया,वही विश्वविद्यालय के वित्त नियंत्रक गुरजीत सिंह कल्सी ने बताया कि पूर्व ठेके फर्म साबरीन फर्म ने अभी तक कर्मचारियों के वेतन सम्बन्धी कोई भी ईसीआर चालान बिल प्रस्तुत नही किये है जिसकी वजह से अभी भुगतान लटका हुआ है अगर फर्म बिल प्रस्तुत करती है तो भुगतान पर विचार किया जायेगा।।अभी भी भारी पुलिस फोर्स के बीच जिला प्रशासन और विश्वविद्यालय प्रशासन सफाई कर्मचारियों को समझाने में जुटा हुआ है।।।


 


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