NCERT की 'नकली किताबो' की फैक्टरी के साथ 50 करोड़ का माल बरामद, भाजपा नेता पर नकली किताब छापने का आरोप,
आवाम-ए-अजीज हिन्दी साप्ताहिक
मेरठ /22अगस्त/ प्रदेश के मेरठ जिले में मिलिट्री इंटेलिजेंस, पुलिस और एसटीएफ की संयुक्त छापेमारी में 50 करोड़ रुपये की एनसीईआरटी की डुप्लीकेट किताबें मिली हैं। मौके से किताबो के साथ ही 06 प्रिंटिंग मशीन भी बरामद हुई है और एक दर्जन लोग हिरासत में लिए गए है
मेरठ यूनिट के डीएसपी बृजेश कुमार सिंह ने मिलेट्री इंटेलिजेंस की इनपुट पर परतापुर पुलिस के साथ जब परतापुर थाना क्षेत्र के अक्षरौंडा काशीपुर मार्ग पर बने गोदाम पर छापा मारा तो एनसीईआरटी के नाम और लोगो लगी भारी संख्या में पाठ्य पुस्तके बरामद होते देख भौचक्के रह गए!
मौके पर मौजूद लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ हुई तो बताया गया कि ये किताबे दिल्ली रोड स्थित मोहकमपुर एन्क्लेव में छापी जाती थी।तभी सूचना आयी कि छपाई कारखाने में आग लगा दी गयी है। पुलिस टीम ने वहां पहुंच कर तुरंत कार्यवाही किया आग बुझा दी गयी। छपाई कारखाने से अध जली और साबुत, भारी मात्रा में किताबो के साथ ही 06 प्रिंटिंग मशीनें बरामद हुई ,जिन्हें पुलिस टीम ने अपने कब्जे में लिया।
मौके से हिरासत में लिए लोगों ने बताया किये किताबें भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के नेता सचिन गुप्ता के प्रिंटिंग प्रेस में छापी जा रही थीं। जो कारवाई की खबर होते ही फरार हो गया है। भागते-भागते सचिन गुप्ता ने अपने कारखाने में आग लगवा दिया ,जिससे सबूत न रहे।
मौके पर पकड़े गए लोगों ने कहा कि बीजेपी नेता सचिन गुप्ता, एनसीईआरटी की नकली किताबों की छपाई कर भाजपा के झंडे लगी गाड़ियों से किताबों की सप्लाई कई दूसरे राज्यों जैसे उत्तराखंड, दिल्ली, हरियाणा, मध्य प्रदेश, राजस्थान में कर रहा था । इसके अलावा यूपी के कई जिलों में भी ये नकली किताबें भेजी जा रही थीं।
परता पुर थाने में मुकदमा दर्ज किया गया है, पुलिस हिरासत में लिए गए लोगो से फरार आरोपी सचिन गुप्ता और उसके धंधे के बारे में विस्तार से पूछताछ कर रही है।
ऐसे होता है खेल
एनसीईआरटी की सरकारी किताबें फुटकर विक्रेताओं को 15 प्रतिशत कमीशन पर मिलती हैं। इनका छपाई केंद्र दिल्ली के अलावा कहीं और नहीं है। असली किताबें पाने के लिए फुटकर विक्रेताओं को पूरी रकम एडवांस जमा करनी पड़ती है। जबकि एनसीईआरटी की डुप्लीकेट किताबें विक्रेताओं को 30 प्रतिशत कमीशन पर मिल जाती हैं। इसमें एडवांस पेमेंट नहीं देना होता। इसलिए इस गिरोह से थोक और फुटकर किताब विक्रेता भी मिले हुए होते हैं।
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